Torrent details for "Shekhar Ek Jeevani (Hindi Editon) - Sachidanand Hiranand Vaatsya…" Log in to bookmark
Controls:
×
Report Torrent
Please select a reason for reporting this torrent:
Your report will be reviewed by our moderation team.
×
Report Information
Loading report information...
This torrent has been reported 0 times.
Report Summary:
| User | Reason | Date |
|---|
Failed to load report information.
×
Success
Your report has been submitted successfully.
Checked by:
Category:
Language:
Hindi
Total Size:
213.2 MB
Info Hash:
21B18612C5195B11B40A7ABEE9BC76870B93070E
Added By:
Added:
Sept. 25, 2026, 4:12 p.m.
Stats:
|
(Last updated: Sept. 25, 2026, 4:12 p.m.)
Name
DL
Uploader
Size
S/L
Added
-
213.2 MB
[37
/
12]
2026-09-25
| Uploaded by anonymous | Size 213.2 MB | Health [ 37 /12 ] | Added 2026-09-25 |
NOTE
SOURCE: Shekhar Ek Jeevani (Hindi Editon) - Sachidanand Hiranand Vaatsyaayan
-----------------------------------------------------------------------------------
COVER

-----------------------------------------------------------------------------------
MEDIAINFO
शेखर : एक जीवनी’ अज्ञेय का सबसे अधिक पढ़ा गया उपन्यास; हिन्दी की एक ऐसी कथा-कृति जिसे हर पीढ़ी का पाठक जरूरी समझता आया है और जिससे गुजरने के बाद वह जीवन की एक भरी-पूरी छलछलाती नदी में डूबकर निकल आने जैसा अनुभव करता है। उपन्यास का नायक शेखर स्वयं अज्ञेय हैं अथवा कोई और व्यक्ति, यह हमेशा कौतूहल का विषय रहा है। कुछ लोग इसे पूरी तरह उनकी आत्मकथात्मक कृति मानते हैं, लेकिन स्वयं अज्ञेय का कहना है कि यह ‘आत्म-जीवनी’ नहीं है। वे कहते हैं कि ‘आत्म-घटित’ ही आत्मानुभूति नहीं होता, पर-घटित भी आत्मानुभूत हो सकता है यदि हममें सामथ्र्य है कि हम उसके प्रति खुले रह सकें।…शेखर में मेरापन कुछ अधिक है।’ लेकिन यह कथा ऐसी नहीं है कि इसे ‘एक आदमी की निजू बात’ कहकर उड़ाया जा सके। अज्ञेय इसे अपने युग और समाज का प्रतिबिम्ब मानते हैं। इसमें ‘मेरा समाज और मेरा युग बोलता है,…वह मेरे और शेखर के युग का प्रतीक है।’ बहुआयामी और संश्लिष्ट चरित्रों के साथ अपने समय-समाज और उनके बीच अपनी अस्मिता को आकार देते व्यक्ति की वेदना को तीव्र और आवेगमयी भावात्मकता के साथ अंकित करते इस उपन्यास के नायक शेखर के बारे में अज्ञेय की टिप्पणी है : ‘शेखर कोई बड़ा आदमी नहीं है, वह अच्छा भी आदमी नहीं है। लेकिन वह मानवता के संचित अनुभव के प्रकाश में ईमानदारी से अपने को पहचानने की कोशिश कर रहा है।…उसके साथ चलकर आप पाएँगे कि आपके भीतर भी कहीं पर एक शेखर है जो…जागरूक, स्वतंत्र और ईमानदार है, घोर ईमानदार।’
×



